Wednesday, July 17, 2024

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History of  ISRO: साइकिल पर गया था भारत का पहला रॉकेट, आज चंद्रयान-3 ने चांद पर जमाए है अपने पाँव 

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO एक ऐतिहासिक उद्यम है, जो भारत को अंतरिक्ष गतिविधियों में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त करने में मदद करता है। इसका गठन 1969 में हुआ था, और इसने भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में बहुतायत की उत्कृष्टता और अद्वितीयता का परिचय दिया है।

ISRO ने अनेक अन्तरिक्ष मिशनों को सफलतापूर्वक संपन्न किया है, जिसमें चंद्रयान, मंगलयान, और भारतीय उपग्रह निर्माण और प्रक्षेपण शामिल हैं। इसके अलावा, ISRO ने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से भी अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को मजबूती दी है।

ISRO की प्रमुख मिशनों और उपलब्धियों के अलावा, इसकी योजनाओं और अनुसंधान क्षमता को भी विशेष रूप से सराहा जाता है। यह अंतरिक्ष विज्ञान, तकनीक, और अनुसंधान में नई ऊर्जा और दृढ़ता का स्रोत है।

इसरो भारतीय समाज के लिए गर्व का विषय है और अंतरिक्ष अनुसंधान में भारत को एक अग्रणी राष्ट्र बनाने के लिए अपने संकल्पित उद्देश्यों की ओर प्रयासरत है।

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full form of ISROISRO का पूरा नाम क्या है ? 

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation)

ISRO भारत की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी है, जो अंतरिक्ष विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुप्रयोगों के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास कार्यों का संचालन करती है। इसकी स्थापना 15 अगस्त, 1969 को हुई थी, और तब से यह भारत को अंतरिक्ष क्षेत्र में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ISRO के कार्यों का उद्देश्य विज्ञान, अभियांत्रिकी और प्रौद्योगिकी के माध्यम से भारत और मानवजाति के लिए बाह्य अंतरिक्ष के लाभों को प्राप्त करना है।

Main motives of ISROISRO के कुछ प्रमुख उद्देश्य हैं

  • अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का विकास करना: ISRO ने स्वदेशी रूप से उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी और जीएसएलवी) विकसित किए हैं, जिससे वह उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित करने में आत्मनिर्भर हो गया है। इसके अलावा, ISRO ने दूरसंचार, मौसम, नेविगेशन और पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों सहित विभिन्न प्रकार के उपग्रहों का भी विकास किया है।
  • अंतरिक्ष अनुसंधान करना: ISRO ने चंद्रमा और मंगल ग्रह जैसे अन्य ग्रहों का पता लगाने के लिए मिशन शुरू किए हैं। इसके अलावा, यह अंतरिक्ष विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों जैसे कि अंतरिक्ष भौतिकी, खगोल विज्ञान और वायुमंडलीय विज्ञान में शोध कर रहा है।
  • अंतरिक्ष अनुप्रयोगों को बढ़ावा देना: ISRO के विकसित अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों का उपयोग दूरसंचार, शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन और कृषि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में किया जा रहा है।

ISRO की कुछ प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं:

  • आर्यभट्ट का प्रक्षेपण: यह भारत का पहला उपग्रह था, जिसे 1975 में सोवियत संघ की मदद से अंतरिक्ष में भेजा गया था।
  • चंद्रयान-1 का प्रक्षेपण: यह भारत का पहला चंद्र मिशन था, जिसे 2008 में लॉन्च किया गया था। इसने चंद्रमा की सतह और वातावरण का अध्ययन किया।
  • मंगलयान का प्रक्षेपण: यह भारत का पहला मंगल मिशन था, जिसे 2013 में लॉन्च किया गया था। इसने मंगल ग्रह के वातावरण और सतह का अध्ययन किया।
  • 104 उपग्रहों का एक साथ प्रक्षेपण: 2017 में, ISRO ने पीएसएलवी रॉकेट का उपयोग करके एक ही बार में 104 उपग्रहों का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया, जो एक विश्व रिकॉर्ड है।

यह सिर्फ कुछ उदाहरण हैं। ISRO ने अपने अस्तित्व के दौरान कई अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम को वैश्विक मानचित्र पर मजबूती से स्थापित किया है। यह आज भी नई ऊंचाइयों को छूने का प्रयास कर रहा है और भविष्य में और भी बड़ी उपलब्धियां हासिल करने की उम्मीद है।

who is the chairman of ISROISRO के अध्यक्ष 

वर्तमान में, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष श्री एस. सोमनाथ हैं। उन्होंने 14 जनवरी 2022 को यह पदभार ग्रहण किया था। इससे पहले, वह विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) के निदेशक के रूप में कार्यरत थे, जो प्रक्षेपक रॉकेट प्रौद्योगिकी विकास का अग्रणी केंद्र है। उन्होंने द्रव नोदन प्रणाली केंद्र (एलपीएससी) के निदेशक और जीएसएलवी मार्क III प्रक्षेपक रॉकेट के परियोजना निदेशक के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

श्री सोमनाथ के नेतृत्व में ISRO नए आयाम छू रहा है। हाल ही में, ISRO ने गैगanyaan मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने के लिए मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान वाहन का सफल परीक्षण किया। उन्होंने चंद्रयान-3 और शुक्र यान मिशन जैसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया है।

उनके अनुभव और दूरदृष्टि से ISRO को भविष्य में और भी अधिक सफलता प्राप्त करने की उम्मीद है।

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where is ISRO located in indiaभारत में ISRO का स्थान

भारत में ISRO का मुख्यालय और विभिन्न केंद्र स्थापित हैं। यहाँ आपको प्रमुख केंद्रों के स्थान मिलेंगे:

मुख्यालय: अंतरिक्ष भवन, बेंगलुरु: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का प्रशासनिक मुख्यालय बेंगलुरु में स्थित है। यहाँ से अंतरिक्ष कार्यक्रमों की नीति निर्माण और कार्यान्वयन होता है।

प्रमुख केंद्र:

  • विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी), तिरुवनंतपुरम: यह केंद्र रॉकेट प्रणाली के विकास और प्रक्षेपण के लिए जाना जाता है। यहाँ ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) और भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) जैसे प्रक्षेपक वाहनों का विकास हुआ है।
  • यू आर राव उपग्रह केंद्र (यूआरएससी), बेंगलुरु: यह केंद्र उपग्रह प्रणाली के डिजाइन और विकास में अग्रणी है। यहाँ से संचार, रिमोट सेंसिंग और नेविगेशन उपग्रह जैसे विभिन्न प्रकार के उपग्रह बनाए गए हैं।
  • सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी), श्रीहरिकोटा: यह केंद्र उपग्रहों और प्रक्षेपक यानों के एकीकरण और प्रक्षेपण के लिए प्रमुख है। यहाँ से भारत के अधिकांश अंतरिक्ष यान लॉन्च किए जाते हैं।
  • अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (एसएसी), अहमदाबाद: यह केंद्र अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों पर शोध और विकास करता है। यहाँ से संसाधन प्रबंधन, कृषि, आपदा प्रबंधन आदि क्षेत्रों में उपग्रह आंकड़ों का उपयोग किया जाता है।
  • राष्ट्रीय सुदूर संवेदी केंद्र (एनआरएससी), हैदराबाद: यह केंद्र उपग्रह आंकड़ों के ग्रहण, प्रसंस्करण और प्रसारण का कार्य करता है। यहाँ से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग विभिन्न सरकारी और निजी संस्थानों द्वारा किया जाता है।

इसके अलावा, ISRO के अन्य कई केंद्र और इकाइयाँ पूरे भारत में फैली हुई हैं। ये केंद्र विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखते हैं, जैसे कि प्रणोदन प्रणाली, अंतरिक्ष विज्ञान, संचार प्रौद्योगिकी आदि।

ISRO के संस्थापक – founder of ISRO

   डॉ. विक्रम साराभाई ISRO के दृष्टिपट में दृढ़ महान संस्थापक के रूप में ध्यान में रखे जाते हैं। उनकी पूर्वदर्शिता और नेतृत्व ने भारत को अंतरिक्ष अन्वेषण की दुनिया में प्रवेश के लिए मौके की बुनियाद रखी।

ISRO में कैसे शामिल हों  (how to join ISRO) 

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में नौकरी कैसे पाएं?

ISRO भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की धुरी है और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक अग्रणी संस्थान है। यदि आप अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं, तो ISRO आपके लिए एक शानदार विकल्प हो सकता है। लेकिन वहां नौकरी पाना आसान नहीं है। इसके लिए कड़ी मेहनत, लगन और सही रणनीति की जरूरत होती है। आइए, ISRO में नौकरी पाने के तरीकों के बारे में विस्तार से जानते हैं:

शैक्षणिक योग्यताएं (Educational qualifications):

  • ISRO में वैज्ञानिक/अभियंता के पदों पर भर्ती के लिए न्यूनतम योग्यता स्नातक डिग्री (बीई/बीटेक/बीएससी इंजीनियरिंग) है।
  • कुछ पदों के लिए मास्टर डिग्री (एमई/एमटेक) की आवश्यकता भी हो सकती है।
  • अधिकांश पदों के लिए न्यूनतम 65% अंकों या 6.84 से अधिक सीजीपीए होना आवश्यक है।

प्रवेश परीक्षाएं:

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  • ISRO में वैज्ञानिक/अभियंता के पदों पर भर्ती के लिए मुख्य रूप से तीन प्रवेश परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं:
    • GATE (ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग): यह राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है, जो इंजीनियरिंग और विज्ञान के विभिन्न विषयों में आयोजित की जाती है। GATE स्कोर के आधार पर ISRO कई पदों पर भर्ती करता है।
    • ICRB परीक्षा (ISRO सेंट्रलाइज्ड रिक्रूटमेंट बोर्ड परीक्षा): यह ISRO द्वारा आयोजित की जाने वाली सीधी भर्ती परीक्षा है। यह परीक्षा मुख्य रूप से कंप्यूटर, मैकेनिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स स्ट्रीम के इंजीनियरिंग स्नातकों के लिए होती है।
    • IIST (भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान) प्रवेश परीक्षा: यदि आप अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी में गहन रुचि रखते हैं, तो आप आईआईएसटी में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकते हैं। आईआईएसटी के छात्रों को सीधे ISRO में नौकरी के अवसर मिलते हैं।

अन्य महत्वपूर्ण बातें:

  • अच्छा शैक्षणिक रिकॉर्ड: आपके शैक्षणिक प्रदर्शन पर बहुत ध्यान दिया जाता है। इसलिए, अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दें और अच्छे अंक प्राप्त करने का प्रयास करें।
  • प्रोजेक्ट वर्क और इंटर्नशिप: अंतरिक्ष से संबंधित परियोजनाओं में भाग लेने और इंटर्नशिप करने से आपको अनुभव प्राप्त होगा और यह आपके आवेदन को मजबूत बनाएगा।
  • अच्छे संचार कौशल: वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्रों में भी स्पष्ट और प्रभावी ढंग से संवाद करने की क्षमता बहुत महत्वपूर्ण है।
  • टीम वर्क: ISRO में अधिकांश काम टीम के रूप में किया जाता है। इसलिए, टीम वर्क और सहयोग की भावना रखना जरूरी है।

नौकरी के अवसरों के बारे में जानकारी:

  • ISRO की आधिकारिक वेबसाइट (https://www.ISRO.gov.in/Careers.html) पर नियमित रूप से नौकरी के विज्ञापनों की जांच करें।
  • अन्य वैज्ञानिक संस्थानों और अंतरिक्ष से संबंधित संगठनों में नौकरी के अवसरों के बारे में भी पता करें।

ISRO में वैज्ञानिक बनना (how to become a scientist in ISRO)

अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में काम करने का सपना रखते हैं और ISRO में वैज्ञानिक बनना चाहते हैं? तो यह लेख आपके लिए ही है! ISRO में वैज्ञानिक बनने के लिए विभिन्न रास्ते मौजूद हैं, जिनमें से चुनने से पहले आपको अपनी रुचि और योग्यता को ध्यान में रखना होगा। आइए, इन रास्तों को विस्तार से समझते हैं:

शैक्षणिक योग्यता (Educational qualification):

  • 12वीं के बाद: IIT/NIT में प्रवेश लेकर या IISc Bangalore/IIST Thiruvananthapuram जैसे संस्थानों में दाखिला लेकर अंतरिक्ष विज्ञान या इंजीनियरिंग से संबंधित स्नातक डिग्री प्राप्त करें।
  • स्नातक डिग्री के बाद: वैज्ञानिक के तौर पर सीधी भर्ती के लिए ISRO द्वारा आयोजित ICRB परीक्षा दें। इसके लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर साइंस आदि विषयों में B.Sc या B.Tech डिग्री अनिवार्य है।
  • अनुभव और विशेषज्ञता: यदि आपके पास अनुभव और विशेषज्ञता है, तो आप PhD के बाद सीधे ISRO में वैज्ञानिक पद के लिए आवेदन कर सकते हैं।

प्रवेश परीक्षाएँ:

  • JEE Advanced/Kishore Vaigyanik Protsahan Yojana (KVPY): इन परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करके IIT/NIT/IISc आदि संस्थानों में प्रवेश पाएँ।
  • ICRB परीक्षा: यह मुख्य द्वार है, जिसमें सफल होने पर आपको लिखित परीक्षा और साक्षात्कार से गुजरना होगा।
  • GATE: GATE स्कोर वैज्ञानिक के पद के लिए सीधे भर्ती में सहायक हो सकता है, हालांकि अनिवार्य नहीं है।

अन्य महत्वपूर्ण बातें:

  • मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ अंतरिक्ष विज्ञान में गहरी रुचि और लगन जरूरी है।
  • प्रोजेक्ट वर्क, इंटर्नशिप और शोध कार्यों में भाग लेकर अपना अनुभव बढ़ाएँ।
  • निरंतर सीखने की आदत विकसित करें और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में हो रहे विकासों से अपडेट रहें।

उपयोगी लिंक्स  (Important links):

इस मार्गदर्शिका का पालन करके और कड़ी मेहनत के साथ आप अपना ISRO वैज्ञानिक बनने का सपना पूरा कर सकते हैं!

ISRO के वर्तमान अध्यक्ष  ( present chairman of ISRO)

डॉ. विक्रम साराभाई के गतिशील नेतृत्व ने ISRO का मार्गदर्शन जारी रखा है। उनके परिचालन में, संगठन ने उत्कृष्ट मिशनों और प्रौद्योगिकी नवाचारों सहित अद्वितीय उपलब्धियों को देखा है।

ISRO वैज्ञानिक की वेतन  (salary of ISRO scientist per month) 

ISRO वैज्ञानिक के वेतन में पद, अनुभव और विशेषज्ञता जैसे कई कारक शामिल होते हैं। सातवें वेतन आयोग के अनुसार, शुरुआती स्तर पर एक ISRO वैज्ञानिक का मूल वेतन ₹56,100 होता है, जो वरिष्ठ पदों के लिए ₹39,100 तक जा सकता है। इसके अलावा, उन्हें महंगाई भत्ता (डीए), मकान किराया भत्ता (एचआरए) और परिवहन भत्ता जैसे भत्ते भी मिलते हैं। अनुमानित तौर पर, कुल मिलकर एक ISRO वैज्ञानिक का मासिक वेतन ₹84,000 के आसपास होता है, हालाँकि यह कुछ हद तक भिन्न हो सकता है।

निष्कर्ष:

आज़ादी के बाद से लेकर के ISRO के बनने तक, भारत की विज्ञान और प्रौद्योगिकी में क्षमताओं का प्रमाण है। हम अद्भुत मील के पत्थर को देखते हुए जारी रहते हैं, यह स्पष्ट है कि ISRO अंतरिक्ष अन्वेषण के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन लोगों के लिए, जो इस असाधारण यात्रा का हिस्सा बनने की इच्छा रखते हैं, ISRO में शामिल होने की जटिलताओं को समझना भारत की अंतरिक्ष विरासत में योगदान करने की पहली कदम है।

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