Thursday, July 18, 2024

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किसान आंदोलन 2.0 से जुड़े हर सवाल के जवाब यहां जानिए

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किसानों ने मंगलवार को पंजाब-हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर अपनी मांगों को लेकर अभियान शुरू किया। उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए क़ानून बनाने और स्वामीनाथन आयोग की सभी सिफ़ारिशों को लागू करने की मांग की।

हरियाणा की सीमा में दाखिल होने पर किसानों को रोकने के लिए शंभू बॉर्डर पर कड़ी व्यवस्था की गई। वहाँ कंटीले तार लगाए गए, बैरिकेडिंग की गई और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई।

साथ ही, सिंघु, टीकरी, गाजीपुर और गौतमबुद्ध नगर की सीमाओं पर भी बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है।

कुछ सीमाओं पर सीमेंट और लोहे की बैरिकेडिंग की गई है, जिसका मकसद है किसानों को रोकना। इसके साथ ही, किसानों को रोकने के लिए कंटीले तार और कंटेनर भी लगाए गए हैं।

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हरियाणा में किसानों की सीमा पर आंसू गैस हमला

किसानों के खिलाफ हुए हरियाणा के सीमा पर एक घटना में, किसानों ने सीमा में दाखिल होने की कोशिश की, जिसके परिणामस्वरूप उन पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए।

हरियाणा के सात ज़िलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को बंद किया गया है, और पंचकुला और चंडीगढ़ में धारा 144 लागू की गई है, जिससे सुरक्षा में वृद्धि हुई है।

बुधवार को, पहले दिन के मुकाबले, किसानों का प्रदर्शन शांत रहा, हालांकि दूसरे दिन भी आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ, लेकिन किसानों ने बैरिकेडिंग तोड़ने का प्रयास नहीं किया।

किसानों का ‘दिल्ली चलो’ आंदोलन: कृषि कानूनों के खिलाफ ग्रामीण भारत बंद

किसानों के दो बड़े संगठन, संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा, ने अपनी मांगों को लेकर ‘दिल्ली चलो’ का नारा दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा ने 16 फरवरी को एक दिन के लिए ग्रामीण भारत का बंद आह्वान किया है।

दो साल पहले, दिल्ली के सीमा पर बैठे किसानों का आंदोलन इतना उच्च स्तरीय था कि नरेंद्र मोदी सरकार को कृषि संशोधन कानूनों को रद्द करना पड़ा था। इनमें कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) कानून-2020, कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर कानून 2020, और आवश्यक वस्तुएं संशोधन अधिनियम 2020 शामिल हैं।

किसान समुदाय में डर है कि सरकार उनके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्यों को समाप्त करने और खेती-किसानी के कॉरपोरेटाइज़ेशन को बढ़ावा देने की सोच सकती है। इसके बाद, वे अधिकतर एग्री-कमोडिटी कंपनियों की बैंगनी में अवश्य फंसेंगे।

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किसानों ने कृषि कानूनों के रद्द होने के बाद अपना आंदोलन वापस लिया

कृषि कानूनों के रद्द होने के बाद, किसानों ने अपनी मांगों को लेकर दिल्ली में आंदोलन शुरू किया था। इसके समर्थन में सरकार ने उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देने का वादा किया था, साथ ही अन्य मांगों को भी पूरा करने का आश्वासन दिया था।

सरकार ने किसानों के मुद्दे पर गंभीरता से काम करने के लिए एक कमेटी बनाई है। इस कमेटी में शामिल हैं कृषि और किसान कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय।

हाल ही में इस कमेटी ने किसानों के साथ दो बार बातचीत की, लेकिन बेनतीजा रही। इसके बाद किसान संगठनों ने निर्णय लिया कि 13 फरवरी को दिल्ली में एक महारैली का आयोजन किया जाएगा।

किसानों के समर्थन में पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने किसानों के साथ हो रहे अत्याचारों की कड़ी निंदा की और सरकार से रचनात्मक बातचीत के लिए आग्रह किया।

पिछली बार क्या मांगे थी किसानो की ?

1. न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी):

   – किसानों को उनकी उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिए जाने की नीति का ऐलान.

   – एक समिति का गठन किया जाए, जिसमें संयुक्त किसान मोर्चे के प्रतिनिधि भी शामिल हों.

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2. मौत पर मुआवज़ा:

   – आंदोलन के दौरान मौत हुई किसानों के परिवार को सरकार से मुआवज़ा देने की मांग.

3. मामले की पुनरप्राप्ति:

   – विरोध प्रदर्शन के दौरान राज्य और केंद्र की एजेंसियों के खिलाफ दर्ज सभी मामले को पुनरप्राप्त करने की मांग.

4. पराली जलाने में अपराधी नहीं ठहराया जाए:

   – पराली जलाने के मामले में किसानों को अपराधी नहीं ठहराया जाने की मांग.

सरकार ने क्या दिया था आश्वासन?

  • सरकार ने घोषणा की है कि वह तीनों कृषि कानूनों को वापस लेगी।
  • अगर किसान आंदोलन और पराली जलाने के मामले दर्ज हैं, तो सरकार उन्हें वापस लेने का वादा कर रही है।
  • मास्टर स्ट्रोक में एक नई योजना की घोषणा की गई है, जिसके लिए एक समिति बनाई जाएगी। इसमें राज्यों और केंद्र के अधिकारियों के साथ-साथ कृषि विशेषज्ञों और किसानों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा।
  • किसान आंदोलन के दौरान हत्या हुए किसानों के परिवारों को पंजाब, हरियाणा, और उत्तर प्रदेश सरकारें प्रत्येक परिवार को पांच लाख रुपये का मुआवजा देंगी। साथ ही, एक व्यक्ति को नौकरी देने का भी प्रस्ताव मंजूरी प्राप्त हुई है।

किसान आंदोलन 2.0 में कब-कब क्या-क्या हुआ?

– 5 जून, 2020: मोदी सरकार तीन कृषि बिल लायी।

– 14 सितंबर, 2020: अध्यादेशों को संसद में पेश किया गया।

– 17 सितंबर, 2020: तीनों कृषि बिल लोकसभा से पारित।

– 20 सितंबर, 2020: विपक्ष के विरोध के बाद राज्यसभा में भी पारित हुए।

– 27 सितंबर, 2020: राष्ट्रपति ने क़ानून को मुहर लगाई।

– नवंबर 2020: किसानों का विरोध शुरू हुआ।

– दिसंबर 2020: सुप्रीम कोर्ट ने क़ानूनों को स्थगित किया।

– नवंबर 2021: पीएम मोदी ने कृषि क़ानूनों की वापसी का ऐलान किया।

– 2 दिसंबर 2021: कृषि क़ानून निरस्तीकरण क़ानून, 2021 अधिसूचित किया गया।

– 9 फ़रवरी 2022: सरकार ने क़ानूनों को रद्द किया।

– 08 फ़रवरी और 12 फ़रवरी 2024: किसान संगठनों और केंद्रीय मंत्रियों के बीच बातचीत जारी।

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